मुसलमानों के विकास, वक्फ के जमीन का सही इस्तेमाल हेतु यह संशोधन जरूरी है:- रविशंकर प्रसाद

arun raj
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नई दिल्ली:- पटना साहिब सांसद एवम् पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद आज लोकसभा में वक्फ बिल संशोधन पर जोरदार भाषण दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का कहना है कि वक्फ बिल में संशोधन होना चाहिए और कहते हैं कि नहीं भी होना चाहिए। आज कल लाल किताब बहुत दिखती है, लेकिन हम संसद में संविधान की हरी किताब लेकर आए हैं। संविधान में लिखा है कि महिलाओं के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा और यदि सरकार उन्हें सशक्त करने के लिए कोई कानून ला रही है तो यह गलत कैसे हुआ।
श्री प्रसाद ने कहा कि आर्टिकल 15 कहता है कि लिंग, क्षेत्र, भाषा और नस्ल के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं हो सकता। मैं बिहार से आता हूं और वहां बड़ी संख्या पसमांदा मुस्लिमों की है। यूपी में भी इनकी बड़ी आबादी है। यदि नए बिल में वक्फ बोर्ड में पिछड़े मुसलमानों को भी प्रतिनिधित्व देने की बात है तो फिर आखिर परेशानी क्या है। उन्होंने कहा कि अब तक वक्फ बिल में जितने भी बदलाव हुए हैं, सब मौलानाओं के दबाव में हुए। 1995 में बदलाव तब आया, जब राम मंदिर आंदोलन चल रहा था। तब इन्होंने तुष्टीकरण के लिए वक्फ बिल में बदलाव कर दिया। आखिर यह तुष्टिकरण की राजनीति हुई या फिर मुसलमानों के हित साधने की कोशिश हुई।
श्री प्रसाद ने आर्टिकल 25 का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वक्फ की जमीन बर्बाद हो रही है अगर वक्फ की जमीन लूटी या हड़पी जा रही हो तो मुसलमानों के विकास के लिए वक्फ की जमीन का सही इस्तेमाल हेतु यह कानून बनाई जा सकती है, यह अधिकार संविधान के आर्टिकल 25 देती है। उन्होंने कहा कि वक्फ बिल में जो संशोधन हो रहा है, उसकी अनुमति संविधान का आर्टिकल 15 देता है। वक्फ की संपत्ति को लूटा जा रहा है और सरकार कैसे देखकर चुप रह सकती है। उन्होंने कहा कि 8.2 लाख वक्फ संपत्तियां हैं। श्री प्रसाद ने लोकसभा में पूछा कि बताया जाए कि इन संपत्तियों पर कितने स्कूल, अनाथालय, स्किल सेंटर खुले हैं? यदि यह गिनती होने लगे तो पता चलेगा कि क्या हकीकत है। आज यदि वक्फ बिल से हालात सुधारने की कोशिश है तो इनको परेशानी क्या है। इसकी वजह यह है कि दिल से कहते हैं कि संशोधन हो, लेकिन राजनीतिक मजबूरी इनके पैर खींचती है।
साथ ही श्री प्रसाद ने शाहबानो से सायरा का जिक्र करते हुए कहा कि याद करिए कि सुप्रीम कोर्ट ने जब शाहबानो केस में गुजारे भत्ते का आदेश दिया गया तो उस फैसले को ही पलट दिया गया। 75 साल की विधवा महिला को कुछ 100 रुपये दिए गए तो हंगामा खड़ा कर दिया गया। शाहबानो से सायरा बानो तक यही कहानी है। तीन तलाक के खिलाफ मुस्लिम महिलाएं जब सुप्रीम कोर्ट में गईं तो इनकी सरकार ने दो साल तक जवाब ही नहीं दिया। उन्होंने कहा कि आज सरकार मुस्लिमों की संपत्ति को लूट से बचाने के लिए बिल लाई है तो हंगामा हो रहा है। सांसद रविशंकर प्रसाद ने सीएए का जिक्र करते हुए भी कहा कि जब देश पर धारा 370 की समाप्ति हेतु कानून बनाई जा रही थी तब इन्होंने ही इनका विरोध किया था और कहा था कि देश कहा जाएगा इसका बवाल किया था। श्री प्रसाद ने कहा कि यह सवाल तो बनता ही है कि आखिर वोट बैंक के लिए देश कहां तक जाएगा। सीएए पर क्या-क्या सवाल खड़ा किया गया। हिंदुओं, ईसाइयों और सिखों को भारत लाया गया, जिनका बाहर उत्पीड़न हो रहा था। उससे भारत के मुसलमानों पर कोई असर नहीं हुआ। यह सोचने की बात है कि मुस्लिम जमात के आदर्श कौन हैं। क्या मुस्लिम समाज के आदर्श वोटों की सौदागरी करने वाले होंगे। उनके आदर्श मौलाना आजाद, अशफाक, कबीर, मलिक मोहम्मद जायसी और अब्दुल हमीद होंगे।

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